मैं भी पढ़ने जाऊँगी
मम्मी-मम्मी बैग मंगा दो
मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
नहीं मंगाई आज बैग तो
खाना मैं नहीं खाऊँगी ।।
भैया जाता पढ़ने स्कूल
रोज सुबह बच्चों के संग ।
घर में बैठकर मैं दिनभर
हो जाती हूँ बिलकुल तंग ।।
रीना जाती, श्यामा जाती,
कृष्णा भी पढ़ने जाता है।
इन्हें देखकर मैया री मोरी,
मेरा मन ललचाता है ।।
जब भैया चला जाता स्कूल,
मैं अकेली रह जाती हूँ ।
खा-पी करके घर में केवल–
चुप चाप सो जाती हूँ ।।
मम्मी-मम्मी बैग मंगा दो
मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
नहीं मंगाई आज बैग तो–
खाना मैं नहीं खाऊँगी ।।
माँ, क्यों झूठे तूँ डरती है,
अब तो मैं हो गई बड़ी।
मुझको भी जाने दे स्कूल,
क्या चिंता है तुझे पड़ी।।
पढ़-लिख करके मै भी मम्मी,
भैया जैसा बन जाऊंगी।
रोज सुबह पढ़ने जाऊँगी,
लौट शाम घर आऊँगी ।।
मुझको तुम किताब मंगा दो,
पढ़ना-लिखना मैं सीखूंगी।
आ जाए जब पढ़ना-लिखना,
नानी को खत लिखूंगी ।।
नानी मेरे घर आ जाओ,
मेरे साथ तुम हलवा खाओ।
नई कहानी रोज सुनाओ,
कभी ना मेरे घर से जाओ।।
पापा को खत लिखूंगी,
पापा आप जल्दी आ जाओ।
मेरे और भैया के लिए,
बिस्कुट और टॉफी लाओ।।
मिलकर तब नानी,पापा से
आयेगा कितना आनंद ।
हँसी-खुशी से सभी रहेंगे,
पढ़ने जाऊँगी सानन्द ।।
मम्मी-मम्मी बैग मंगा दो,
मैं भी पढ़ने जाऊँगी ।
नहीं मंगाई आज बैग तो,
खाना मैं नहीं खाऊँगी ।।
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