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अब जाकर के हाथी दादा, गरमी से राहत पाए ।

                
                                                         
                            चंदन वन में हाथी दादा, गरमी से अकुलाए
                                                                 
                            
गए पेड़ की छाँव में, फिर भी राहत न पाए।
उतर पड़े तब एक नदी में, छक कर खूब नहाए
सूंड़ में भर कर ठंडे जल को, अपनी प्यास बुझाए

अब जाकर के हाथीदादा, थोड़ी राहत पाए
पर, यह क्या? फिर गरमी, हाथी दा घबराये
लगे सोचने गरमी से अब, उनको कौन बचाए
तब भालू काका ने उनको, मीठे तरबूज खिलाए
अब जाकर के हाथी दादा, गरमी से राहत पाए ।
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56 मिनट पहले

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