आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गर्मी की ऋतु आई

                
                                                         
                            गरम-गरम मौसम है भाया, गरमी की ऋतु आई।
                                                                 
                            

देखो धूप से बचकर रहना, करना नहीं ढिठाई ।
मत खाना तुम चाट-पकौड़े, ना ही खाना मिठाई ।
दूषित जल ना पीना तुम, कम खाना बरफ-मलाई ।
सैर-सपाटे का क्षण है ये, फिर भी करो पढ़ाई ।
खाया जो चाट-पकौड़े, या जम के खाई मिठाई ।
इंजेक्शन तो लगेगा ही, पीनी होगी दवाई ।
दूषित जल के पीने से, होगी पेट गड़ाई ।
केवल रोना ही आयेगा, भूलेगी अंगड़ाई ।
बिता दिया जो समय सुहाना,
केवल सैर-सपाटे में ।
भूल जाएगा तुमको सब कुछ, पड़ जाओगे घाटे में ।
अगली कक्षा में है जाना, जमकर करो पढ़ाई ।
गरमी से तुम बचकर रहना, भीषण गरमी आई ।

गरम-गरम मौसम है भाया, गरमी की ऋतु आई ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
44 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर