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चंदामामा आना तुम

                
                                                         
                            चंदामामा चंदामामा, क्यों रात में आते हो ?
                                                                 
                            
हम बच्चों के कोमल मन को, ऐसे क्यों भरमाते हो ?
कुछ दिन तक दिखलाई देकर, क्यों तुम छिप जाते हो ?
चंदामामा हमें बताओ, क्यों सूरज से शर्माते हो ?

बात मान लो मेरी मामा ! धरती पर तुम आओ ना !
संग हमारे बैठो कुछ क्षण, हमको कुछ बतलाओ ना ।
हम तो तुमको रोज बुलाते
तुम्हीं न आते जाने क्यों
कभी-कभी तो बिना बताए, छुप जाते ना जाने क्यों

आओ तो एक बार सही
चोर सिपाही खेलेंगे
झूमेंगे, गायेंगे मिलकर,
अपनी गाड़ी ठेलेंगे
तुम सबको उजियाली देते, कितने अच्छे लगते हो !
पर ना जाने हम बच्चों को,
क्यों ऐसे तुम ठगते हो ?
देखो ! रोज दिखाई देना, वर्ना मैं कट्टी कर लूंगा ।
मांगोगे जो कभी खिलौने,
एक न दूंगा, एक न दूंगा ।
इतना ऊपर तुम रहते हो, आ पाऊँगा मैं कैसे ?
मम्मी दी है नई किताबें, तुम्हें दिखाऊँगा कैसे ?

आ जाते तुम मेरे घर तो, बस्ता अपना तुम्हें दिखाता
कॉपी, पेंसिल, रबर, कटर, सच मैं कुछ न छिपाता ।
पढ़ना-लिखना तुम्हें सिखाता, हाथ पकड़कर तुम्हें बताता ।
अच्छे-अच्छे चित्र बनाकर, चंदामामा तुम्हें दिखाता

माँ से कह हलवा बनवाता, हाथ से अपने तुम्हें खिलाता
दूध पिलाता, खीर खिलाता, अपने संग बिस्तर पे सुलाता
बोलो न मामा कब आओगे ? संग मेरे तुम कब खाओगे ?
ऐसे कब तक तड़पाओगे ? रूठ जाऊँगा, फिर पछताओगे ।
गोल-गोल दिखते हो इकदिन फिर क्यों टेढ़े हो जाते हो ?
पतला होते-होते मामा, क्यों एक दिन खो जाते हो ?
छोटा-बड़ा, बड़ा-छोटा फिर एक दिन गायब हो जाना
ये कैसा नौटंकी करते, दिखते-दिखते खो जाना ।

नहीं दिखाई जब तुम देते, कुछ अच्छा ना लगता है।
चंदामामा मुझे ना भूलो, मिलने को जी करता है।
तारों संग तुम रोज खेलते मुझसे क्यों तुम रूठे हो ?
देखो ! यूँ ना रूठो तुम, तुम तो बड़े अनूठे हो।

परसों मेरा जन्म दिन है, मामा निश्चित आना तुम ।
अपने साथ कुछ तारों को भी चंदामामा लाना तुम ।
सच कहता हूँ चंदामामा, मन को बहुत लुभाते तुम।
रिंकू, टिंकू, गुड़िया, ममता, सब बच्चों को भाते तुम ।
मैं कह दूंगा सब बच्चों से, देखो मामा को न सताना ।
जो वो मांगें, उन्हें खिलाना, आयें वो तो मुझे बताना ।

वादा करो तुम आओगे न ! नहीं तो मुझको दु:ख होगा
देखूँगा घर तुमको अपने, मुझको कितना सुख होगा।
छुप जाता जब सूरज नभ में, धीरे-धीरे आते हो
दूर भगाकर अंधकार को, अपना रंग जमाते हो ।

मीठी रोशनी दुधिया-दुधिया धरती पर फैलाते हो
अंधेरे में राह सभी को, मामा तुम्हीं दिखाते हो।
चंदामामा, चंदामामा, क्यों रात में आते हो ?
हम बच्चों के कोमल मन को, ऐसे क्यों भरमाते हो ?
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46 मिनट पहले

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