चलो नहा लें ठंडे जल में
मौसम गरम-गरम
भाग्य भरोसे न रह करके
करते रहें करम
हम अबोध हैं मन के चंचल
कृपा बनाए रखना।
हे ईश्वर ! अवलम्ब तुम्ही हो
हमें टिकाए रखना।।
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