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नहीं दीखता सड़क के पार ।।

                
                                                         
                            मम्मी! जरा देख तो बाहर
                                                                 
                            
कैसी हवा चली है ।
उड़ते पत्ते, कागज, धूल
दिखती नहीं गली है ।।

भठ रहें हैं खेत, बाग़, वन
भठ रहें हैं घर आंगन ।
हिलते परदे, दरवाजे सब
काँप रहा है मेरा तन ।।

इतनी हवा कहां से आई,
किसने छोड़ा इन्हें उधर ?
दिख रहा है धूल ही धूल
आ तूं भी जरा देख उधर ।।

झूम रहें हैं तरु और पौधे,
झूम रहे बिजली के तार ।
क्या हो रहा ये मुझे बताओ
नहीं दीखता सड़क के पार ।।

आंधी कहते इसी को लाल!
छोड़ा ईश्वर ने इसे उधर ।
भठ जाओगे तुम भी, देखो–
अब ना जाओ और उधर ।।
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48 minutes ago

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