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बेटी की पीड़ा

                
                                                         
                            बेटी बेटी कहते हो
                                                                 
                            
बेटे पर प्यार लुटाते हो
क्या कभी समझा है तुमने
बेटी के मन की गहराई को
कितने संघर्षों से भरी हुई
उसकी जीवन की राहें
फिर भी चेहरे पर मुस्कान लिए
चलती रहती हर पल साथ
जब छोटी होती बेटी
तो रौनक घर की कहलाती
उसकी हंसी से आंगन महके
हर आंख में खुशियां आती
पर जैसे-जैसे बड़ी होती बेटी
खामोशी छाने लगती
मां मां बाप की आंखों में फिर
एक चिंता पलने लगती
क्या मेरी बेटी को मिल पाएगा
एक अच्छा सा घर परिवार
क्या उसके सपनों की दुनिया में
मिलेगा उसको सच्चा प्यार
एक दिन बेटी पूछ बैठी .................
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3 घंटे पहले

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