जीवन लिखा काली स्याही
गुरुवर ने रंग भर दिए हज़ार।
क्यों ओर कही सर झुकाऊं
जब बिन मांगे मेरा गुरु देता मेरा साथ।।
-संध्या शर्मा "श्रेष्ठ"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X