मिल गया एक रस्ता है, पग मस्ती में जहां चल ले
साहित्य सुधा की खुशबू, मन की काया में मल ले
जग की सारी ही विवशता, अवसर के जैसा माना
जितना ही ज्यादा सीखा, उतना ही बना अनजाना
दिख गया सरोवर ऐसा, जिसमें सुनीति का जल है
लग जाए उसमें डुबकी, मन में तो उठी हलचल है
भावों शब्दों का मिलन हो, नौका सरोवर में घूमे
आनंद से आह्लादित हो, मानस जीवन में घूमे
-कुँवर
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