मन से सारा मेल है
और मन का सारा खेल है
मन अगर बिगड़ गया तो
सारा कुछ ही फेल है
-कुँवर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X