बदलता है दिन भी रोज
और यह रात आती है
बिना किसी असमंजस के
सुबह दिन लौटा जाती है
बदलाव ऐसे ही कर कुदरत
जो जाए लौट वो आए
जिसे हम छोड़ना न चाहें
वो हमसे दूर न जाए
हमें मालूम है कुछ भी
यहाँ स्थायी नहीं हैं
अहसासों से बढ़कर कुछ भी
यहाँ कमाई नहीं है
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