आलोचना हो निंदा हो,
हटो नहीं डटो वहीं
सिद्ध करके दिखा दो,
तुम कहीं गलत नहीं
-कुँवर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X