गैरों की लालच में फँसकर
छोड़े जाते हैं अपने कब
जब चली जाएगी जवानी ये
कहाँ काम आएंगे सपने तब
- कुँवर संदीप सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X