क्षमता व इच्छाओं में,फर्ज ने लगा दी आग
अंधे होकर उसी दिशा में, रहे भागते आप
कष्ट झेलते हुए आपने, फर्ज कर दिया पूरा
वही लोग अब कहते हैं, तू घर का नहीं भाग
-कुँवर
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