आल्हा उदल जहां पहुँचि गए
तहाँ और केहु टिकि न पाय
जौने ओर चला जाय घोड़ा
भर मैदान साफ होइ जाय
लइ तलवारि पाकर मुठिया में
चम-चम चम-चम चमके जाय
जेहि भिड़ा आल्हा उदल से
भरि-भरि मुंह से माटी खाय
सुनेह नाम आल्हा उदल कै
हर दुश्मन जाता थर्राय
काव बताई काव सुनाई
कहां वीरता अब उ बाय
अब तो बस छीना झपटी है
मर्दानगी तो गई ओराय
-कुँवर
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