आभा मर्यादा में बसती
मुस्कान ही नहीं है सब कुछ
मत समझो अपना भाव बहुत
यदि कोई नहीं कहता है कुछ
खामोशी में भी शोर बहुत
सुनने वाला सुन लेता है
जिसको दरकिनार किया जाए
खुद ही खुद को गिन लेता है
-कुँवर
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