नयी वर्षगांठ होगी 14 सितंबर को
बीते कल की प्यास सजी ही रहेगी
सफर में मुश्किलें हैं बढ़ती जा रहीं
राष्ट्रभाषा आभास में वैसी ही रहेगी
सशक्तीकरण का दिखावा चलेगा
मानस में अंग्रेजी ही बलवती रहेगी
-कुँवर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X