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इसलिए कविताएं करता हूँ

                
                                                         
                            मिलता है जब दर्द मुझे
                                                                 
                            
तेरे संग बीती बातों से,
उन झुठे-कसमो वादों और
गलियों वाली मुलाकातों से,
तब ढूंढ़ ढूंढ़ कर Break up shayri
मैं रात रात भर पढ़ता हूँ,
तुम्हारी याद न आ जाए फिर
इसलिए कविताएं करता हूँ ।

अब डरता हूं मैं सपनों में
अपने ही मीठी यादों से,
मुकर गयी तू अपनी कसमों
तेरे अपने उन वादों से,
"कैसे भूलें प्यार" ये लिखकर
मैं सर्च Google पर करता हूँ,
तुम्हारी याद ना आ जाये फिर
इसलिए कविताएं करता हूँ ।

सोच- सोच कर लिखता हूँ मैं
अपने दर्द -ए-एहसासों को,
कुछ टूटे सपनों की मंजिल
कुछ नम आँखों की प्यासों को,
ये छोड छाड़कर प्यार मोहब्बत
मैं शब्द वफ़ा के गढ़ता हूँ,
तुम्हारी याद ना आ जाये फिर
इसलिए कविताएं करता हूँ ।।
 
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22 घंटे पहले

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