कुछ लोग आए और आकर यूँ ही चले गए।।
बादल हवा के साथ मिलकर यूँ ही चले गए।।
आती रही सदाएं मुझे कई मील तक मगर,,
हादसें अपना हाल सुना कर यूँ ही चले गए।।
क्या हाल हो गया है दिल का तेरे बग़ैर देख,,
रातों की दांस्ता दर्द बयाँ कर यूँ ही चले गए।।
होठों पे तिश्नगी ज़हन के समंदर रहा क़रीब,,
कस्ती रही खाली पर मुसाफ़िर यूँ ही चले गए।।
अब कौन आएगा किसी मज़ार ए शरीफ़ पर,,
जो आए थे वो भी तो आकर यूँ ही चले गए।।
रंज़िश की आड़ लेकर क़त्ल इस तरह किया,,
दिल को मेरे शराब में डुबोकर यूँ ही चले गए।।
हर दिन गुज़र गया मेरा इस इंतज़ार में ही देव,,
आयेंगे किसी रोज़ वो बिठाकर यूँ ही चले गए।।
-सुनील देव
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