निसां यादों के दिल पे हो तो खम अच्छे नहीं लगते
के ताज़ा फूल ना हो तो ज़ख्म अच्छे नहीं लगते।।
चलो अच्छा हुआ के ख़ुद ब खुद ही मिट गई यादें,,
नज़र लाचार हो तो दर्द ओ ग़म अच्छे नहीं लगते।।
भलाई साथ देगी उम्र भर अब ये तो नहीं मालूम,,
मगर ए जिंदगी तेरी राह में हम अच्छे नहीं लगते।।
पुराने ख़्वाब जितने भी थे सारे दफ़्न कर आए हैं,,
के इस चेहरे पे अब नए बरहम अच्छे नहीं लगते।।
ग़ुलामी किसको भायी हैं जो हमें रास आती देव,,
ज़िगर पर आज गैरो के सितम अच्छे नहीं लगते।।
-सुनील देव
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