किसी से बात कर लेने से कहां कोई ख़ास होता है।
अगर दिल में भरा हो ज़हर तो मन उदास होता है।
नहीं आंखों का ये धोखा के जो सच है वही सच है,
जहां तक जाए है नज़रें कहां कोई पास होता है।।
नहीं आसान जीना यां सभी तो अपने में ही गुम,,
किसी को क्या सुनाएं हिज़्र नहीं आभास होता है।
गुलों से खेलना बस तितली का ही अच्छा है यारों,,
किसी को क्या पता के इनमें भी एहसास होता है।
दिल से दिल का सौदा करना तो संभालके करना,,
यहाँ जब घाव मिलता है तो तब बद-हवास होता है।
सदा तो किसकी चलती आयी जो मेरी चलेगी यां,,
ना कोई बादशाह यहाँ पर ना कोई दास होता है।।
ये मिट्टी भी मिट्टी में ही इक दिन मिल जाएगी देव,,
यहाँ हर कोई अकेला हैं नहीं कोई पास होता है।।
-सुनील देव
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