गुजरी यादें ज़हन में सजाकर कौन रखता है।।
जवानी डूब जाए तो मुकद्दर कौन रखता है।।
सताए लोगों से क्या पूछता है हाल पानी का,,
जला हो आग में जो उम्र भर कौन रखता हैं।।
किसी ने खो दिए बच्चे किसी ने घर गंवाया है,,
किसी मलबे तले आंखों में घर कौन रखता है।।
जिसने देखा हो अपनो को सोते मिट्टी के तले,,
ऐसे हालात में ख़्वाब मुख़्तसर कौन रखता है।।
मुझी से पूछते हो और खुद दुखड़ा सुनाते हो,,
खोलके आंखों के आगे समंदर कौन रखता है।।
कभी मासूम बच्चों के शव देखे तो भर आए,,
दिल ऐसा हक़ीक़त में यहाँ पर कौन रखता है।।
मिलकर दफना दिया हो जब अपनो ने ही देव,,
ऐसी बस्ती में फिर खुशनुमां घर कौन रखता है।।
-सुनील देव,
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