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तेरी ना कुछ ख़ता इसमें आज हम हो गए मिट्टी

                
                                                         
                            चलो अच्छा हुआ के थक गए हम हो गए मिट्टी।।
                                                                 
                            
सभी जंजाल से आज छूट के हम हो गए मिट्टी।।
के मौसम कैसे आए देखना तुम सो गए हम तो,,
के पीछे छोड़ आए दर्द सारे हम हो गए मिट्टी।।
बहुत तड़पाया है इस ज़िंदगी ने क्या कहें तुमसे,,
अब तुमको ही मुबारक़ हो के हम हो गए मिट्टी।।
कमाई काम ना आयी के सब कुछ रह गया यूँही,,
चले चार कांधों पे आख़िर में हम हो गए मिट्टी।।
तुझे लगता था अभी तो वस्ल ए वक़्त है काफ़ी,,
के आजा देख ले सारे के सारे हम हो गए मिट्टी।।
सभी इक दूसरे को देखकर कसते रहे बस तंज़,,
किसी को क्या कहें यारों के हम हो गए मिट्टी।।
के मरना लाज़मी है एक दिन जाना तो होगा देव,,
तेरी ना कुछ ख़ता इसमें आज हम हो गए मिट्टी।।
-सुनील देव
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59 मिनट पहले

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