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बहाने क्यूँ बनाते हो।

                
                                                         
                            अगर जाना ही है तो जाओ बहाने क्यूँ बनाते हो।।
                                                                 
                            
किसी की ज़िंदगी पर अब निशाने क्यूँ लगाते हो।।
के जब तक जान में है जान जी लो ज़िंदगी अपनी
किसी की आँख से यादों के ख़ज़ाने क्यों चुराते हो
यहाँ कोई ना देगा साथ सफ़र तन्हा ही कटना है,,
चलो तुम ही सही लेकिन दीवाने क्यूँ कहाते हो।।
बड़ी मुश्किल से मिलती हैं ये सांसे यार दुनियाँ में ,,
किसी की वास्ते खुशियाँ ये न जाने क्यूँ गंवाते हो।
गुज़र जाएंगे ये दिन भी जरा सा सब्र रखना बस,,
किसी के वास्ते घर को दवाखाने क्यूँ बनाते हो।।
घने जंगल में आंखों को हमेशा खोल कर रखना,,
के आंखों पर ये शब के आशियाने क्यों लगाते हो।
तुझे जो इश्क़ होता तो आ जाते ना अब तक देव,
अगर सोये हो तो सो जाओ सुलाने क्यूँ बुलाते हो।
-सुनील देव
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17 घंटे पहले

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