आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नज़्म - क्या ये सच है कि तुम मुझे प्यार नहीं करते

                
                                                         
                            नज़्म
                                                                 
                            

क्या ये सच है के तुम मुझे प्यार नहीं करते
फिर मेरे वादों पर क्यों नहीं एतबार करते
क्यूं ये कहते हुए डरते हो तुम
की मरते हो, मुझपे मरते हो तुम
की तुम्हारे बिन मेरा दिल नहीं लगता
की तुम्हारे बिन मेरी ज़िन्दगी अधूरी है
की तुम्हारे बिन मेरी हर खुशी अधूरी है
की तुम्ही से मेरी ज़िन्दगी पूरी है
की तुम्हारे बिन हर मौसम पतझड़ का मौसम है
की तुम्हारे बिन आँखें हरदम मेरी नम हैं
की तुम्हारे बिन जीवन व्यर्थ रेगिस्तान सा
की तुम्हारे बिन सबकुछ इक शमशान सा ।
क्यूं हर बार खामोश रह जाते हो तुम
बोलो कभी तुम भी बोलो की
मुझसे प्यार करते हो तुम ।।

डॉक्टर संबोध 'शैली'
एसोसिएट प्रोफेसर
इतिहास, स्व. पं. न. कि. श.रा. स्नातकोत्तर महाविद्यालय,
दौसा , राजस्थान।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर