दोस्त वो जो लड़े, मगर साथ न छोड़े,
लाख ग़ुस्सा हो, मगर दोस्ती की डोर न तोड़े।
मेरी ख़ामोशी में भी जो मेरा दर्द पहचान जाए,
मेरे “मैं ठीक हूँ” में छिपी उदासी जान जाए।
दोस्त वो जो बिन कहे मदद को आ जाए,
गिरने से पहले ही हाथ बढ़ा जाए।
जब सारी दुनिया मुँह मोड़कर चली जाए,
वो अकेला ही सही, मगर साथ निभाए।
मेरी जीत पर मुझसे ज़्यादा मुस्कुराए,
मेरी हार में हौसला बनकर आए।
मेरे लिए दुनिया से भी लड़ जाए,
मगर ग़लत राह पर मुझे सही राह दिखाए।
दोस्ती न मतलब है, न कोई व्यापार है,
ये तो दिल से जुड़ा एक अनमोल रिश्ता यार है।
हज़ारों मिलेंगे इस दुनिया के बाज़ार में,
मगर सच्चा दोस्त ही परिवार है।
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