आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आख़िर ये भी तो वक़्त-वक़्त की बात है!

                
                                                         
                            मगर ऐ दोस्त, इतना भी गुरूर मत करना,
                                                                 
                            
किसी के बुरे वक़्त पर इतना न हँसना।
आज जो ज़मीन पर है, कल आसमान छुएगा,
वक़्त का पहिया है, हर हिसाब पूरा करेगा।
न दौलत हमेशा, न शोहरत हमेशा,
न ग़म हमेशा, न राहत हमेशा।
बस सब्र रख, अपनी मेहनत पर ऐ इंसान,
हर रात के बाद होता है नया सवेरा महान।
आज मेरी बारी है, कल तेरा भी वक़्त आएगा,
जो आज अधूरा है, कल मुकम्मल हो जाएगा।
बस याद रखना, ज़िंदगी का यही दस्तूर है,
किसी का वक़्त अच्छा, तो किसी का वक़्त दूर है।
क्योंकि कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई मेरे दोस्त,
अभी तो बस शुरुआत है…
आज तेरा वक़्त है, कल मेरा होगा—
आख़िर ये भी तो वक़्त-वक़्त की बात है!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
34 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर