मगर ऐ दोस्त, इतना भी गुरूर मत करना,
किसी के बुरे वक़्त पर इतना न हँसना।
आज जो ज़मीन पर है, कल आसमान छुएगा,
वक़्त का पहिया है, हर हिसाब पूरा करेगा।
न दौलत हमेशा, न शोहरत हमेशा,
न ग़म हमेशा, न राहत हमेशा।
बस सब्र रख, अपनी मेहनत पर ऐ इंसान,
हर रात के बाद होता है नया सवेरा महान।
आज मेरी बारी है, कल तेरा भी वक़्त आएगा,
जो आज अधूरा है, कल मुकम्मल हो जाएगा।
बस याद रखना, ज़िंदगी का यही दस्तूर है,
किसी का वक़्त अच्छा, तो किसी का वक़्त दूर है।
क्योंकि कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई मेरे दोस्त,
अभी तो बस शुरुआत है…
आज तेरा वक़्त है, कल मेरा होगा—
आख़िर ये भी तो वक़्त-वक़्त की बात है!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X