हे ईश्वर तब महानता तुम्हारी समझ में आती हैं
रोज सुबह जब चिड़िया मीठे स्वर में गाती हैं
जब प्रातः कालिया खिलकर हर कोना महकाती है
जब शीत की बूंदे गिर कर तृणों को शीतल बनाती है
हे ईश्वर तब महानता तुम्हारी समझ में आती हैं
जब कभी रोशनी तो कभी अंधियारी संसार में जब छा जाती हैं
जब नदिया निरन्तर बहती जाती है
जब नन्ही दाना लेकर फिर आकाश में उड़ जाती है
हे ईश्वर तब महानता तुम्हारी समझ आती है
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