कोई पूछे...
कैसे है कृष्ण
तुम्हारे जिंदा है कितने इनके सहारे
कृष्ण की में क्या छवि बताऊ
रखो विश्वास तब तुम्हे बताऊ
न पाओगे इनको रुपो मे
न मन्दिर न तस्वीरो मे
वो तो है वो कोमल काया
शीतल है जिनकी छाया
उन्हे न ढढो इन हस्तियो मे
वो न रहते बस्तियों में
वो बसते हर कण-कण मे
हर पेड़-पौधों पशुओं में
जब भी रूठू वो मुझे मनाते
भटके को राह दिखाते
पहले अन्दर से मैं हटाओ
फिर दूढ़ने पर हर जगह उन्हे पाओ
बो तो है सबके अन्दर
पहले करो मन को सुन्दर
' वो है हर किसी के प्यारे
ऐसे है कृष्ण हमारे
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