आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चुनावी सरगर्मियाँ

                
                                                         
                            शोर सुना है मैंने भी की अबकी बार सरकार बनेंगे,,
                                                                 
                            
बरसों तक जो दबे रहे वो मुद्दे अब प्रचार बनेंगे।।

अखबारों के पन्ने अब रोजगार के समाचार से सजेंगे,,
झूठे वादे करने वाले अब सच्चे कपटी मक्कार बनेंगे।।

मुद्दा-ए सियासत पर ज्ञानी तुम्हें भरमार मिलेंगे,,
चुनावी रंगो में रंगे सियासती दल सत्कार करेंगे।।

सत्ता के भूखे शेरों को जनता से शिकार मिलेंगे,,
जीत तो उनकी निश्चित है पर तुमको अंततः हार मिलेंगे।।

"मुद्दा अभी गरम है" ...कहने वाले पत्रकार मिलेंगे,
शोर सुना है मैंने भी की अबकी बार सरकार बनेंगे।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर