वक्त से बस गुजारिश है इतनी
अब तो जीने का सहारा इतना दे दो
पल भर के सुकून के बदले
मेरे जीवन पर इतना रहम कर दो
जख्म इतना भी ना दो कि
सहना भी हो जाए मुश्किल
एक रहमत जो हो जाए मुझ पर
दर्द की दास्तान सिमट जाए पिघल कर ।।
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