ये सफर भी छूट जाएगा
ये शहर भी छूट जाएगा
जिस आंगन में पैदा हुआ
गिर गिर कर चलना सीखा
वो आंगन भी छूट जाएगा
जिन कंधों पर बैठ आकाश में
उड़ने का सपना देखा
वो कंधे भी झुक जाएंगे
उन्हें सहारे की जरूरत होगी
उन अनमोल रिश्तों को मत छोड़ना
जो तुम्हे जीवन की हर घड़ी में
तुम्हारे साथ थे ।।
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