आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तुम अच्छी लगती हो सादगी वाले चेहरे में

                
                                                         
                            तुम अच्छी लगती हो सादगी वाले चेहरे में,
                                                                 
                            
जींस-कुर्ती, बिखरी ज़ुल्फ़ें और बरसात के पहरे में।
तुम उससे भी ज़्यादा अच्छी लगती हो,
जब तुम मिल-जुलकर रहती हो माँ-पिताजी, भाई-बहन, सहेलियों सबसे।
और करती हो प्रेम गिलहरियों, पक्षियों, नदियों,
पहाड़ों और प्रकृति से।
और सच कहूँ, तब तुम बहुत अच्छी लगती हो,
जब तुम आवारा, बिगड़ैल, चरित्रहीन लोगों से रहती हो मीलों दूर।
और समझती हो सम्मान, प्रतिष्ठा और चरित्र को ही अपना कोहिनूर।

-नाम सागर
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर