आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पुलवामा के शहीद

                
                                                         
                            पुलवामा के शहीदों को,
                                                                 
                            
देश कभी भुला ना पायेगा,
दिए जो बलिदान देश पर,
स्वर्ण अक्षरों से इतिहास लिखा जाएगा।
करते हैं हम उनको नमन,
चाहते हैं इस देश में अमन,
फिर कभी उठे किसी की नज़र
तो करना होगा हमें
उन दानवों का दमन।
मां भी कितनी रोई होगी,
कितनी रात बेटे को यादकर
न सोई होगी,
कितनों ने देखे थे सपने,
सपने सारे टूट गए,
अपने उनसे छूट गए,
हमेशा हमेशा के लिए
बेटे उनसे रुठ गए।
फिर ना कभी वो आएगा,
न ख़ुशियों की सौगात
मां पर बरसाएगा।
अब बेटा लौटकर
वापस न कभी आएगा....
अब बेटा लौटकर
वापस ना कभी आएगा..


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर