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सफर

                
                                                         
                            उठो पथिक उठो पथिक
                                                                 
                            
क्यों रुक गए हो आज तुम
चले चलो, बढे चलो
हो वक्त की आवाज़ तुम
डगर अभी नई नई है
नया नया ये मोड़ है
हजारों भागते यहाँ
न जाने कैसी होड़ है
सफल हुआ कोई यहाँ
कोई यहाँ विफल हुआ
जो आज से निकल गया
वो जाने वाला कल हुआ
चला चला है, जो चला है
उचाईयो पर वो खड़ा है
जो रुक गया है राह में
पाषाण बनके वो पड़ा है
सहज नहीं ये राह है
कही मौज है, कही आह है
ढिढुरती रात में कही
मिलती नहीं पनाह है
जो दर्द है भुला के तुम
जो याद है जला के तुम
अटल यही विषय करो
तुम मुश्किलों में जय करो
निकल पड़ो निकल पड़ो
नई सुबह की आस में
है मंज़िले पुकारती अब
आओ पथिक अब पास में
उठो पथिक, उठो पथिक
क्यों रुक गए हो आज तुम
चले चलो बढे चलो
हो वक्त की आवाज़ तुम


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7 वर्ष पहले

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