छोटे हैं तो उनकी जान हैं जिंदगी
पास हर खुशी पर बेजुबान हैं जिंदगी
कुछ दिन तक मौज मस्ती धमाल हैं जिंदगी
जब तक हैं बचपन मालामाल हैं जिंदगी
गुजरे कुछ साल कहीं महान हैं जिंदगी
तो किसी की बदहाल है जिंदगी
हर पल एक नया तूफान है जिंदगी
कही निर्दोष तो कही इलजाम हैं जिंदगी
गमो से भरी नदी के समान हैं जिंदगी
कही बंगलो मे आराम है जिंदगी
कही सड़कों पर लाचार हैं जिंदगी
कही कामयाब तो कही नाकाम हैं जिंदगी
अमीर को देखो तो कहूं बहार हैं जिंदगी
गरीब देखो तो कहहूं लाचार है जिंदगी
और सच कहहूं तो दोनों की तूफान है जिंदगी
बूढ़े हुए तो घर से बाहर है जिंदगी
अंत में चार कंधो पर सवार है जिंदगी
कुछ पल में जलकर मिट्टी के समान है ज़िन्दगी
फिर किस बात का तुझे अभिमान हैं जिंदगी
अगर हो जाए दया आपकी तो कमाल हैं जिंदगी (संतोष तृप्ता)
लेखक सचिन सिंगला
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