आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अभी बेरोजगारी का दौर है

                
                                                         
                            एक बहुत ही बुरी महामारी का दौर है,
                                                                 
                            
ये जो चल रहा है मेरी कलमकारी दौर है,
तुझसे मिलने तेरे घर मिठाई लेकर आएंगे दोस्त,
समझा कर भाई अभी बेरोजगारी का दौर है......
शर्मिंदगी,बेशर्मी,लाचारी का दौर है,
मेहनत,किस्मत,ईमानदारी का दौर है,
अर्थ(धन) से चलने वाली बीमारी का दौर है,
तुझसे मिलने तेरे घर आयेंगे दोस्त,
समझा कर अभी बेरोजगारी का दौर है.....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर