चांद तुम
रहते हो तारों संग
तभी तो सब देख तुझको
ढूंढते हैं
साथी अपने
कौन है जो कहता है कि
तुम तन्हा के साथी
मैं कहूं तुम
जलाते प्रेम में
डूबे दिलों को
कौन कहता हैं कि
तुम तड़पते
चांदनी की रोशनी में
तुम जलाते हो
सभी को।।।।।।।।
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