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संतो की दूरदृष्टि

                
                                                         
                            नीम करोली महाराज
                                                                 
                            
हल्द्वानी फ़र्नीचर मार्ट में
एक भक्त, पूरन चंद्र जोशी के साथ थे,
बाबा दूसरों से बात करते हुए,
किसी गहरी सोच में डूब गए
और कुछ देर तक मौन रहे।

फिर उन्होंने धीरे से कहा,
"पूरन, एक चम्मच पानी पिला दो ,
मुझे बहुत तकलीफ़ हो रही है",
जोशी समझ नहीं पा रहे थे
क्या है मामला ,
फिर भी उन्होंने बाबा के
मुँह में दो चम्मच पानी डाला।

कुछ देर बाद, उनकी आँखों से
दो आँसू गिरे , बाबा ने
पूरन चंद्र से कहा, "रमन नहीं रहे ,
आज भारत ने एक महान संत खो दिया है"।

यह घटना उसी दिन घटी
जिस दिन महर्षि रमन ने
अरुणाचल में अपना
भौतिक शरीर त्यागा था ,
उन दिनो टेलीविजन, मोबाईल न था,
पर संतो की दूरदृष्टि से
कुछ भी नही छिपता था।
-सुबीर कुमार 
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8 महीने पहले

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