मत ब्याहो मुझे बाबा,देखकर लड़का बस सरकारी,
पैसा होगा, घर होगा बेशक होगी उसके पास गाड़ी,
पर क्या करूंगी इन सबका,जब बनकर ही रहना पड़ जाए बेचारी,
मत ब्याहो मुझे बाबा,देखकर लड़का बस सरकारी।
खाना पान भले ऊंचा होगा,होगा रूतबा भारी,
बेशक उसके दादा रहे होंगे, हीरो के व्यापारी,
पर क्या करूंगी इन सबका मैं,जब इन सबका अहम पड़ेगा मुझ पर भारी,
मत ब्याहो मुझे बाबा,देखकर लड़का बस सरकारी।
पहले सब कहेंगे अच्छा है लड़का और स्वभाव भी है परिवारी,
लेकिन अंदर मन का तुम्हें कोई नहीं बताएगा
कि लड़का करता है मदिरापान, है वो एक जुआरी,
मार देगा लत में अपनी,और बेच देगा किसी को बेटी तुम्हारी,
मत ब्याहो मुझे बाबा,देखकर लड़का बस सरकारी ।
सांवला भी चल जायेगा, सुन्दर वर नहीं मुझे जरूरी,
खुद अपना भविष्य बना सकती,क्योंकि मैं हूं आज की नारी,
मत सोचो समाज का,समाज की तो है मति मारी,
मुझे निजी भी चल जायेगा बाबा, नहीं चाहिए सरकारी,
मत ब्याहो बाबा मुझे,देखकर लड़का बस सरकारी।।
सूखी बासी रोटी भी हंसकर खा लूंगी,
विभिन्न पकवान और घी देशी नहीं मुझे जरूरी,
मत भूलो बाबा इतिहास तुम,
कान्हा के छप्पन भोग पर भी थी एक ही तुलसी भारी,
ना भेजो मुझे घर ऐसे,जहां प्यार नहीं बस व्यवसाय हो सरकारी,
मत ब्याहो बाबा मुझे,देखकर लड़का बस सरकारी।।
-आर.वी.टीना
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