चौदह फरवरी आई फिर से,
याद तुम्हारी लाई फिर से।
जहाँ कहीं भी देखूँ मैं,
आँखें भर आई फिर से।
लाल तिरंगे में लिपटे थे,
माँ की गोद सुनी कर डाली,
वो रो-रो कर बस इतना बोली,
"मेरा बेटा लौट के आएगा...?
पत्नी के सूने मांग की बिंदी,
आँसू में घुलकर गिर जाती,
सपनों की वो तस्वीरें,
अब राख बनकर उड़ जाती।
बेटा पूछे पापा कब आएँगे?
किससे कहें कि सो गए हैं,
जो कहते थे देश ही जीवन,
वो तिरंगे में खो गए हैं।
हम कैसे वैलेंटाइन मनाएँ,
जब कोई माँ लाल को रोती है?
कैसे प्रेम दिवस मना पाएँ,
जब भारत माता सोती है?
तुम लौट के आ न सके मगर,
हमने तुमको दिल में रखा,
तुम अमर हुए इस माटी में,
हमने तुमको शीश नवाया।
हे भारत के वीर सपूतों,
तुम्हारे बलिदान को नमन,
जब तक सूरज चाँद रहेगा,
तब तक ये हिंदुस्तान रहेगा।
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