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फिर मुस्कुराएगा ,फिर लहराएगा अपनो के संग ,फिर वक्त बिताएगा

                
                                                         
                            उस फल वाले वृक्ष को देखो ,
                                                                 
                            
कैसे फलों से लदा ,
चुपचाप खड़ा है ,
जितना लदा है ,उतना झुका है ,
कितना ज्यादा हरा भरा है ।

पंछियों का घर भी,
हमेशा वह बना है ,
राहगीरों को मिलती हिम्मत,
उसका छाया घना है ।

जहाँ पैदा हुआ , बड़ा हुआ
उस मिट्टी को पकड़ा हुआ है ।
कितना शान्त , एकदम चुप ,
मदद के लिए तत्पर खड़ा है ।

ये भी सूख जाएगा एक दिन ,
सूखकर भी काम आएगा सबके,
खुद जैसे पेड़ , फिर से बना के ,
फिर सामने आएगा एक दिन ।

फिर मुस्कुराएगा ,फिर लहराएगा
अपनो के संग ,फिर वक्त बिताएगा
दूसरों के लिए फिर मिट जाएगा ,
कभी खुद के लिए कुछ नही चाहेगा ,
इसलिए अपने अस्तित्व को ,
हमेशा कायम रख पाएगा ।।
-रोशन वत्स
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21 घंटे पहले

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