माँ
“प्यार की नदियाँ बहती रहती,
और सुखों का सावन हैं,
माँ की ममता गंगा-यमुना के
संगम सी पावन है,
चार धाम तुम कर ना पाए
है कोई अफ़सोस नहीं,
माँ के चरणों में तुम जा बैठो
वो चारो धाम से पावन है।”
- रोहित तिवारी
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