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विदाई गीत: बाबुल की बगिया सूनी कर चली

                
                                                         
                            आँचल में भर कर प्यार चली,
                                                                 
                            
बाबुल की बगिया सूनी कर चली।
लाडो हमारी आज पराई हुई,
रोती आँखों से विदा कर चली...
आँचल में भर कर प्यार चली।

जिस आँगन में गूंजी थी कलकारियां,
छोड़ चली वो सखियाँ और क्यारियाँ।
गुड़िया, खिलौने सब पीछे छूट गए,
बचपन के हसीन वो सपने रूठ गए।
देहलीज़ लांघ के वो अपने घर चली,
बाबुल की बगिया सूनी कर चली...

मैया का रो-रोकर बुरा हाल है,
भैया के दिल में उठा ये मलाल है।
जिस हाथ को पकड़ा था कल लाड से,
वो हाथ सौंप दिया किसी और के हाथ में।
पलकों में समेटे वो सारा संसार चली,
बाबुल की बगिया सूनी कर चली...

सदा सुहागन रहो, यही है दुआ,
नया घर-आँगन महके, जो तुम्हारा हुआ।
खुशियाँ मिले तुम्हें जीवन में अपार,
ससुराल में बरसे सदा ऐसा ही प्यार।
दुआओं का आँचल सिर पर तान चली,
लाडो हमारी आज पराई हुई,
रोती आँखों से विदा कर चली...
आँचल में भर कर प्यार चली।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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