जो काम बचे हैं कर लो तुम, कल काल यहाँ आ जाएगा
अपनों से मिल लो आज अभी, कल कौन कहाँ रह पाएगा,
मिटाओ गिले और शिकवे सब, वरना यह मन पछताएगा,
बीत गया जो वक्त रे साथी, वो वापस ना आएगा।
झूठे जग के इस मेले में, तू कब तक भरमाया जाएगा,
वैभव, सत्ता और ये दौलत, सब यहीं धरा रह जाएगा,
खाली हाथ ही आया जग में, खाली हाथ सिधाएगा,
बीत गया जो वक्त रे साथी, वो वापस ना आएगा।
माटी के इस पिंजरे से पंछी, एक दिन उड़ जाएगा,
मिट्टी का यह पुतला आख़िर, मिट्टी में मिल जाएगा,
घमंड की इस गाठ को खोल दे, वरना अंत रुलाएगा,
बीत गया जो वक्त रे साथी, वो वापस ना आएगा।
राजा हो या रंक यहाँ पर, काल से कौन बच पाएगा,
जो भी आया इस धरती पर, एक दिन वापस जाएगा,
अच्छे कर्म ही साथ चलेंगे, बाकी सब यहीं रह जाएगा,
बीत गया जो वक्त रे साथी, वो वापस ना आएगा ।
चिता की आग सुलगने से पहले, होश क्या तुझे आएगा,
मौन खड़ी है मौत सामने, कब तक आँख चुराएगा,
थक जाएगी चीख तुम्हारी, जब महाकाल चिल्लाएगा,
बीत गया जो वक्त रे साथी, वो वापस ना आएगा।
भूखे को तुम अन्न खिलाओ, कोई प्यासा प्यास बुझाएगा,
रोते को तुम आज हँसाओ, दुआओं का फल मिल जाएगा,
नेकी की तुम राह चुनो अब, जीवन पावन हो जाएगा,
बीत गया जो वक्त रे साथी, वो वापस ना आएगा।
गिरे हुए का हाथ थाम लो, जीवन जीना आ जाएगा,
ज्ञान बाँट लो अज्ञानी को, जग का अज्ञान मिट जाएगा,
प्रेम बाँटते चलो सभी में, मन का मैल धुल जाएगा,
बीत गया जो वक्त रे साथी, वो वापस ना आएगा।
भटके हुए को राह दिखा दो, पुण्य का खाता खुल जाएगा,
रोते हुए को गले लगा लो, बिगड़ा मुकद्दर संवर जाएगा,
नेकी की राह पे चल पड़ साथी, हर इक रास्ता मिल जाएगा,
बीत गया जो वक्त रे साथी, वो वापस ना आएगा
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
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