मिरी हर एक मुश्किल का वही दरमान होती है
ख़ुदा की रहमतों का माँ ही एक उनवान होती है
छुआ दे हाथ पत्थर पर तो पत्थर मोम हो जाए
थकी हारी हुई रातें भी माँ की जान होती है
सुना है लोग जन्नत की दुआएँ माँगते हैं पर
मिरी जन्नत तो बस माँ की ही वो मुस्कान होती है
सिखाया जिसने चलना और उँगली थाम के मेरी
उसी के साये में ही अब मिरी पहचान होती है
जहाँ में नादिर अब कोई न ऐसा और रिश्ता है
जिसे देखो तो हर आफ़त ही अब आसान होती है
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
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