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बेरहम गर्मी

                
                                                         
                            ऐ गर्मी तू बड़ी बेरहम है।
                                                                 
                            
कड़ी धूप है लेकर आती,
पशु पक्षी सबको तड़पाती।
कूलर पंखा एसी चलवाती,
फिर भी न तुझको एक भी शरम है,
ऐ गर्मी तू बडी़ बेरहम है।

नदी कुआँ तालाब सुखाती,
जल की प्यासी मछली मर जाती।
बडे़-बडो़ के पसीने बहाती,
जीवन तहस-नहस कर जाती।
फिर भी न तुझको एक भी शरम है,
ऐ गर्मी तू बडी़ बेरहम है।

धरती की है तपन बढा़ती,
जीवन को है कठिन बनाती।
जंगल में है आग लगाती,
जनता है प्यासी मर जाती।
फिर भी न तुझको एक भी शरम है,
ऐ गर्मी तू बडी़ बेरहम है।

-रोहित कुमार यादव-
कटरा बांदा (उ०प्र०)   


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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