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क्या करेंगे

Ghazal
                
                                                         
                            गमों में जिंदगी का क्या करेंगे
                                                                 
                            
लबों की ख़ामुशी का क्या करेंगे

मुहब्बत डायरी में लिख चुके हैं
अमाँ अब शाइरी का क्या करेंगे

रक़ीबों से उसे हम छीन भी लें
मगर ऐसी खुशी का क्या करेंगे

हमारी जिंदगी में तीरगी है
मियां हम रौशनी का क्या करेंगे

शराफ़त खानदानी है हमारी
बताओ हम किसी का क्या करेंगे

- रोहित गुस्ताख़

-हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
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एक वर्ष पहले

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