ग़मों में ज़िंदगी का क्या करेंगे
लबों की ख़ामुशी का क्या करेंगे
मोहब्बत डाइरी में लिख चुके हैं
अमाँ अब शायरी का क्या करेंगे
रक़ीबों से उसे हम छीन भी लें
मगर ऐसी ख़ुशी का क्या करेंगे
हमारी ज़िंदगी में तीरगी है
मियाँ हम रौशनी का क्या करेंगे
शराफ़त ख़ानदानी है हमारी
बताओ हम किसी का क्या करेंगे
- रोहित गुस्ताख़
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