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याद तो ज़रूर होगा

                
                                                         
                            याद तो ज़रूर होगा? मेरी कविता
                                                                 
                            
कोरे काग़ज़ पे पैगाम भेजना
तेरी हर यादों को सहेजना
इन्ही यादों से प्यार अपना मशहूर होगा
याद तो ज़रूर होगा?

मेरे आने से वो तेरा बेबाक हो जाना
मोहब्बत के सपनों का था अशियाना
लोगों की नज़रें वो बदलता ठिकाना
याद तो ज़रूर होगा?

बात बात पर तेरा रूठ जाना
मेरी शायरी करना वो तेरा मुस्कुराना
शर्मा के तेरा दांतो तले उंगली दबाना
याद तो ज़रूर होगा?

मेरे बुलाने से तेरा छत पे नंगे पांव आ जाना
हमारे इश्क़ के खतों का अखबार हो जाना
तेरी आशिकी में यूं मेरा बर्बाद हो जाना
याद तो ज़रूर होगा?
Rj_Rohit_Yadav

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7 वर्ष पहले

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